“ज्ञान ही शक्ति है, और शिक्षा उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।”
ज्ञान की आलोक-रेखा जब चेतना को स्पर्श करती है, तब शिक्षा जीवन-दर्शन बन जाती है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, अपितु व्यक्तित्व निर्माण, विवेक जागरण और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रमुख आधार है।
शासकीय महाविद्यालय बरपाली, जो जनजातीय बाहुल्य अंचल में 28 जून 2010 को प्राथमिक शाला भवन के एक कमरे में आरंभ हुआ, वर्तमान में 26 कमरों एवं 5 प्रयोगशालाओं से युक्त अपने स्वयं के भवन में संचालित है।
जनजातीय क्षेत्र में स्थित यह महाविद्यालय ज्ञान, संस्कृति और समावेशी विकास का केंद्र है। स्थानीय जनजातीय विरासत, परंपराओं और प्रकृति-सम्मत जीवन-दृष्टि के साथ आधुनिक शिक्षा, नवाचार और कौशल-विकास को प्रोत्साहित करना हमारी प्राथमिकता है। हमारे समर्पित प्राध्यापकगण अनुशासन, परिश्रम और सामंजस्य की संस्कृति को बढ़ावा देते हुए सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों, खेलकूद, शोध एवं सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से छात्र-छात्राओं को जिम्मेदार नागरिक एवं सक्षम नेतृत्वकर्ता बनाने के लिए कटिबद्ध हैं।
सभी छात्र-छात्राओं से आह्वान करता हूँ कि वे अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित रहें, परिश्रम को अपना हथियार बनाकर, ज्ञान-यात्रा में सक्रिय रहकर उन्नति के शिखर पर पहुँचें।
हम सभी मिलकर ज्ञान, सेवा और सतत् विकास के पथ पर आगे बढ़ें।
शुभकामनाओं सहित
डाॅ. चैतन्यनंद
प्राचार्य
शासकीय महाविद्यालय बरपाली
जिला–कोरबा